पाकिस्तान बॉर्डर के पास आज गरजेंगे भारतीय सेना के फाइटर प्लेन

 पाकिस्तान  सीमा से महज चालीस किलोमीटर दूर राजिस्थान के बाड़मेर में पहली बार हाइवे में लड़ाकू विमानों को उतारा गया। इस नेशनल हाइवे को चार किलोमीटर के एक  हिस्से को इस तरह से तैयार किया गया की उस पर लड़ाकू विमान लैंड कराये जा  सकें !

इस हवाई पट्टी का उद्धघाटन रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और सड़क परिवहन राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कर दिया है। लेकिन उससे एक दिन पहले भारतीय सेना के कुछ लड़ाकू विमानों हाइवे पर ट्रायल कराया गया।

पाकिस्तान सीमा की हवाई पट्टी से उड़ान भरने के बाद इन लड़ाकू विमानों ने हवा में बलैक फास्ट भी किया। जिन लड़ाकू विमानों ने हाइवे पर लैंडिग की उनमे कोई 30-M के आई और जगुआर शामिल रहे।

बताया गया की इस हवाई पट्टी को हाइवे के रख रखाव करने वाली संस्था NACI और एयरफोर्स ने तैयार किया ! देश की सुरक्षा के लिहाज से इस तह की हवाई पट्टियां बेहद अहम् हैं खास तौर से तब जब वो पाकिस्तान की सीमा से इतने करीब हो देश के किसी नेशनल हाइवे पर सेना के विमानों के उतरने का ये पहला मामला है।

इससे पहले दो हजार सत्रह में यमुना एक्सप्रेसवे पर सेना AK विमानों की भी लैंडिग करवाई गयी थी। पर पहली बात तो वो नेशनल हाइवे नहीं दूसरी बात ये की वो किसी अंतरास्ट्रीय सीमा के पास नहीं है और सबसे अहम बात ये की वो एक ड्रिल थी जिसका मकसद केवल ये देखना था की नागरिकों के इस्तेमाल के हाइवे भी इमरजेंसी के वक्त भी सेना के काम आ सकते हैं या नहीं !

अब पहले उस जगह को समझते है जहा ये हाइवे राजिस्थान का बाड़मेर जिला बाड़मेर की पाकिस्तान की सीमा से दूरी करीब चालीस किलोमीटर दूर है आपात लैंडिग की जगह। ये नेशनल हाइवे नंबर नौ सौ पच्चीस ऐ जिसका करीब चार किलोमीटर का एक हिस्सा पहले ही तैयार किया गया की ये एक इमरजेंसी लैंडिंग फ्री हो मतलब ये एक ऐसी हवाई पट्टी जिसका इस्तेमाल देश की सीमा किसी भी इमरजेंसी के वक्त कर पाए !

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अब देश की सेना के सामने इमरजेंसी क्या होगी सीधा सा जवाब ये की या तो जंग होगी। कुछ दिनों पहले अजय देवगन की फ़िल्म रिलीज हुयी नाम था भुज। फ़िल्म देश की ऐसी एक घटना पर आधारित है और फ़िल्म में दिखाया गया है की कैसे उन्नीस सौ इक्कत्तर की लड़ाई के दौरान पकिस्तान ने गुजरात के भुज में भारत की हवाई पट्टी में बमबारी की।

बम गिराए जाने से रनवे बर्बाद हो गए मतलब हवाई पट्टी पर कई फीट गहरे गड्डें हो गए जिसकी वजह से भारत वहां अपने प्लेन नहीं पंहुचा सकता।

एक तरह से ये रनवे रिपेयर होने तक भारत की वायु सेना भी बिलकुल बेबस हो गयी ऐसा कभी भी किसी भी देश के साथ हो सकता है। इसलिए इस तरह की इमरजेंसी की लैंडिग फील्ड बनाये जाते हैं जो आम नागरिकों की इस्तेमाल की सड़कों पर होते हैं ऐसा इसलिए ताकि जंग के दौरान जब सीमा के ठिकानों पर हमले हो तो आम नागरिको के इस्तेमाल की सड़कों का इस्तेमाल सेना कर पाए और दुश्मन को जवाब दे क्योंकि जंग के दौरान भी आम नागरिकों पर हमले की इजाजद  अंतरास्ट्रीय क़ानून नहीं देता।

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